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“अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आई.सी.ए.) के अनुसार सहकारी समिति की परिभाषा इस प्रकार है: - सहकारी समिति वस्तुतः ऐसे लोगों का स्वायत्त गठबंधन होती है, जो अपनी साझा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं की पूर्ति करने के लिए किसी संयुक्त स्वामित्व तथा लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उपक्रम के माध्यम से साथ मिलकर काम करते हैं।

सहकारी समितियाँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाती हैं कि आर्थिक व्यवहार्यता तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों को साथ-साथ निभाया जा सकता है। - बान की-मून – महासचिव, संयुक्त राष्ट्र संघ

नए दाखिले के आवेदन पत्र (द्विभाषी) पूरी तरह और सही ढंग से अंग्रेज़ी के कैपिटल अक्षरों में भरे जाने चाहिए।

समिति को अपने आवेदन पत्र के साथ निम्न दस्तावेज भी जमा करने होंगे:

  • इफको की सदस्यता के लिए प्रबंधन कमेटी का संकल्प पत्र।
  • समिति के पंजीयन प्रमाणपत्र की एक प्रति।
  • सदस्यता शेयर पूँजी की कम-से-कम 25% राशि तथा प्रवेश शुल्क का इफको के नाम से बनवाया गया डिमांड ड्राफ़्ट, जो नई दिल्ली में देय होगा।
  • सहकारी समितियों के संबंधित सहायक/ उप पंजीयक की ओर से जारी किए गए सहकारी समिति की प्रतिष्ठा और अस्तित्व के प्रमाणपत्र।
  • संबंधित सरकारी जिला/राज्य अधिकारी द्वारा की ओर से खाद, कीटनाशक तथा बीज विक्रय का लाइसेंस।
  • संकल्प पत्र की एक प्रति, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित हो कि वह न तो इफको की किसी प्रतिस्पर्धी समिति की सदस्य है और न ही भविष्य में किसी प्रतिस्पर्धी समिति की सदस्य बनेगी।
  • समिति का खाता किसी ऐसे बैंक में होना चाहिए, जहाँ इलेक्ट्रॉनिक अंतरण की सुविधा उपलब्ध हो और बैंक का एक MICR नंबर/IFSC कोड भी हो

आवेदन पत्र सहकारी समितियों के संबंधित सहायक / उप पंजीयक द्वारा अनुमोदित होना चाहिए।

सहायक / उप पंजीयक का अनुमोदन प्राप्त होने के बाद, राज्य विपणन प्रबंधक को उपर्युक्त सभी दस्तावेज़ों का सत्यापन करना होगा और उसके बाद इफको की सदस्यता के लिए समिति के आवेदन पत्र का अनुमोदन करना होगा। सदस्यता का आवेदन भेजने से पहले राज्य विपणन प्रबंधक को समिति की प्रतिष्ठा और अस्तित्व का सत्यापन भी करना होगा।

* ग्राम स्तरीय समितियों के लिए प्रवेश शुल्क 25 रु. और अन्य के लिए 100 रु. है।

इफको की फर्टिलाइजर, बीज और कीटनाशकों की आपूर्ति में सदस्य समितियों को प्राथमिकता दी जाती है।
इफको की सदस्य समितियों को पिछले 15 वर्षों से लगातार इफको में उनकी इक्विटी हिस्सेदारी पर 20% की दर से डिविडेंड का भुगतान किया जा रहा है।
इफको की उपविधियों के अनुसार, सदस्य समिति अपने प्रतिनिधि को इफको की रीप्रेजेंटेटिव जन बॉडी में प्रतिनिधि पद के लिए भेज सकती है।

इफको का प्रतिनिधि चुने जाने पर, उक्त व्यक्ति को -

  • इफको की वार्षिक आम बैठक में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।
  • इफको के निदेशक मंडल की चुनाव में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।
  • संयंत्र के दौरे में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।
  • अंतर-राज्यीय दौरे और शोध संस्थानों तथा कृषि-विश्वविद्यालयों के दौरे का अवसर मिलेगा।

इफको द्वारा आयोजित राज्य/प्रांतीय सलाहकारी समिति की बैठकों में, स्थानीय अतिरेक कार्यक्रमों आदि में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।

  • इफको की सदस्य सहकारी समितियाँ, इफको की उपविधियों में उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार एक रीप्रेजेंटेटिव जनरल बॉडी (आर.जी.बी.) चुनती है। यही आर.जी.बी. इफको की नीतियाँ तय करने वाली सर्वोच्च इकाई है, जो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इफको का मार्गदर्शन करता है। इफको की आर.जी.बी. में 21 निदेशक का चुनाव किया जाता है, जो इफको से जुड़े मामलों के प्रबंधन में अपनी-अपनी भूमिकाएँ निभाते हैं।
  • आरजीबी सदस्य अपने सुझाव देने के लिए विभिन्न राज्यों में होने वाली राज्य सलाहकार समिति की बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं।
  • आरजीबी सदस्य वार्षिक साधारण बैठक में सोसायटी के संचालन संबंधी सुझाव भी दे सकते हैं।

रीप्रेजेंटेटिव जनरल बॉडी (आर.जी.बी.) में इफको के हर प्रकार के सदस्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य होते हैं। आर.जी.बी. इफको के लक्ष्य प्राप्त करने का मार्ग तैयार करती है, जैसा कि इफको की उपविधियों में प्रतिष्ठापित है।

सहकारी सिद्धांत इस प्रकार हैं:

  • स्वैच्छिक और मुक्त सदस्यता
    सहकारी समितियाँ स्वैच्छिक संगठन होती हैं, जो लैंगिक, सामाजिक, नस्लीय, राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव से परे हर ऐसे व्यक्ति के लिए खुली होती हैं, जो उनकी सेवाओं का उपयोग कर सके और सदस्यता की ज़िम्मेदारियाँ स्वीकार करने का इच्छुक है।
  • सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण
    सहकारी समितियाँ लोकतांत्रिक संगठन होते हैं, जिनका नियंत्रण उनके सदस्य करते हैं और जो उनकी नीतियाँ निर्धारित करने तथा निर्णय लेने में सक्रियता से हिस्सा लेते हैं। निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में सेवा प्रदान करने वाले पुरुष और महिलाएँ सदस्यता के प्रति जवाबदेह होते हैं। प्राथमिक सहकारी समितियों में सदस्यों के पास समान मताधिकार होता है (एक सदस्य, एक वोट) और अन्य स्तरों पर गठित सहकारी समितियों का ढाँचा भी लोकतांत्रिक होता है।
  • सदस्यों की आर्थिक प्रतिभागिता
    सहकारी समिति के सदस्य उसमें समान रूप से अपना योगदान करते है और उसकी पूँजी को लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित करते हैं। कम-से-कम उस पूँजी का कुछ हिस्सा तो सहकारी समिति की साझा संपत्ति होता है। यदि हुआ भी तो सदस्यों को आमतौर पर साझा सदस्यता पूँजी से सीमित मुआवज़ा प्राप्त होता है, लेकिन इसके लिए उनका सदस्य होना आवश्यक है। सदस्य निम्नलिखित किसी भी या सभी उद्देश्यों के लिए पूँजी का अतिरिक्त हिस्सा निवेश कर सकते हैं: अपनी सहकारी समिति के विकास के लिए एक कोष का गठन करके, जिसका कम-से-कम कुछ हिस्सा अविभाज्य होगा; सहकारी समिति के साथ अपने लेन-देन के अनुपात में सदस्यों को लाभ पहुँचान के लिए; और सदस्यता द्वारा अनुमोदित अन्य गतिविधियों का समर्थन करने के लिए।
  • स्वायत्तता और स्वतंत्रता
    सहकारी समितियाँ स्वायत्त और स्व-सहायता संगठन होती हैं, जिनका नियंत्रण उनके सदस्यों द्वारा किया जाता है। यदि वे सरकार सहित अन्य संगठनों के साथ कोई समझौता करती हैं या फिर बाहरी स्रोतों से पूँजी जुटाती हैं, तो ऐसा वे उन शर्तों पर करती हैं, जिससे उसके सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण तथा सहकारी समिति की स्वायत्तता सुनिश्चित होती हो।
  • शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना
    सहकारी समितियाँ अपने सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, प्रबंधकों और कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, ताकि वे अपनी सहकारी समिति के विकार में प्रभावी योगदान कर सकें। वे आम जनता – ख़ासतौर से युवा लोगों तथा ओपीनियन लीडर्स को सहकार की प्रकृति और लाभों से परिचित करवाती हैं।
  • सहकारी समितियों के बीच सहकार
    सहकारी समितियाँ स्थानीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ढाँचों के माध्यम से एक साथ मिलकर काम करते हुए अपने सदस्यों के हितों की पूर्ति करती हैं और सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाती हैं।
  • समुदाय की चिंता
    सहकारी समितियाँ उनके सदस्यों द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार काम करते हुए अपने समुदाय के स्थायी विकास के लिए काम करती हैं।

इफको ने वर्ष 1982-83 में देश के सहकारिता आंदोलन में अभूतपूर्व योगदान करने वाले सहकारकर्मी के सम्मान में “सर्वश्रेष्ठ सहकारकर्मी” के नामकरण की शुरुआत की। वर्ष 1996-97 से, “सर्वश्रेष्ठ सहकारकर्मी” पुरस्कार का नाम बदलकर “सहकारिता रत्न पुरस्कार” कर दिया गया। सहकार की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए, वर्ष 1993-94 में “सहकारिता बंधु” नामक एक अतिरिक्त पुरस्कार की शुरुआत की गई।

ये पुरस्कार सहकार की विचारधारा के प्रचार-प्रसार और सहकारिता आंदोलन के सशक्तिकरण में विशिष्ट और अभूतपूर्व योगदान करने वाले उत्कृष्ट सहकारकर्मियों को दिए जाते हैं। इन पुरस्कारों में से प्रत्येक के अंतर्गत 5,00,000 रु की राशि और एक प्रशस्ति-पत्र भेंट किया जाता है और ये पुरस्कार हर वर्ष 14-20 नवंबर तक देश भर में मनाए जाने वाले सहकारिता सप्ताह के दौरान इफको द्वारा “जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल इफको लेक्चर” के दौरान दिए जाते हैं।

राज्य सहकारी संघ, राष्ट्रीय भारत सहकारी संघ तथा इफको के निदेशक मंडल द्वारा प्राप्त अनुमोदनों पर विचार करने के लिए निदेशक मंडल का एक उपसमूह गठित किया जाता है। यह उपसमूह चर्चा के बाद, निदेशक मंडल के समक्ष पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा करता है। इसके बाद बोर्ड पुरस्कार विजेताओं का चुनाव करता है।